हिमाचल में कुदरत का कहर: 109 की मौत, 818 करोड़ का नुकसान

हिमाचल प्रदेश इस समय कुदरत के सबसे भीषण प्रकोप से जूझ रहा है। लगातार हो रही भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ ने अब तक 109 लोगों की जान ले ली है, जबकि 818 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। राज्य के कई जिलों में सड़कों, पुलों, घरों और फसलों को भारी नुकसान हुआ है।

V हालात इतने खराब क्यों हैं?

बारिश का यह दौर सामान्य मानसून से कहीं अधिक तीव्र और घातक रहा। तेज़ बारिश ने मिट्टी को कमजोर कर दिया जिससे बड़े स्तर पर भूस्खलन हुआ। कई स्थानों पर पहाड़ दरक गए, जिससे नेशनल हाईवे और इनर लिंक रोड्स ठप हो गईं। इसके चलते आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार:

प्रशासन और राहत कार्य:

राज्य सरकार ने आपातकालीन राहत बल (NDRF) की कई टीमें तैनात की हैं। हेलीकॉप्टर से फंसे हुए लोगों को निकाला जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता की मांग की है। वहीं केंद्र सरकार ने हालात पर कड़ी निगरानी रखते हुए आवश्यक मदद भेजी है।

जनता का दर्द:

गांवों में पीने के पानी की भारी किल्लत है। हजारों लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। स्कूल बंद हैं और कई इलाकों में बिजली व इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप हैं। पर्यटकों को भी सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है।

पर्यावरण चेतावनी:

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में इस तरह की आपदाएं अब सामान्य होती जा रही हैं, जिसका मुख्य कारण अनियंत्रित निर्माण कार्य, पेड़ों की कटाई, और ग्लोबल वॉर्मिंग है।


निष्कर्ष:

हिमाचल प्रदेश की यह आपदा एक चेतावनी है कि अब भी समय है – प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखें। आम नागरिकों को संयम और सतर्कता के साथ प्रशासन का सहयोग करना चाहिए।


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