Radha Ashtami barsana : राधा अष्टमी बरसाना धाम में रौनक, भक्त हुए भावविभोर

भारत की भक्ति परंपरा में राधा रानी का स्थान सर्वोच्च माना जाता है। हर वर्ष भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि को पूरे भारत में राधा अष्टमी बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। विशेषकर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले स्थित बरसाना धाम में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यही वह पावन भूमि है जहां राधा रानी ने जन्म लिया था। इस अवसर पर बरसाना नगरी भक्ति, प्रेम और आस्था से सराबोर हो उठती है।


बरसाना में भव्य सजावट और उत्सव का माहौल

राधा अष्टमी पर बरसाना का नज़ारा देखते ही बनता है। पूरा नगर फूलों की मालाओं, रंग-बिरंगी झालरों और दीपों से सजा रहता है। श्रीजी मंदिर (राधा रानी मंदिर) में विशेष सजावट की जाती है। मंदिर की दीवारों और गलियारों में भजन और कीर्तन की गूंज वातावरण को दिव्यता प्रदान करती है। ऐसा लगता है मानो पूरी नगरी स्वर्ग लोक का रूप धारण कर चुकी हो।


भक्तों की भीड़ और श्रद्धा

देश ही नहीं, विदेशों से भी लाखों भक्त इस दिन बरसाना पहुंचते हैं। सुबह से ही श्रीजी मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं। लोग राधा रानी के दर्शन और आशीर्वाद के लिए घंटों इंतजार करते हैं, लेकिन चेहरे पर थकान नहीं बल्कि भक्ति की चमक दिखाई देती है। जैसे ही मंदिर के कपाट खुलते हैं, भक्त “राधे-राधे” के जयकारों से वातावरण गुंजायमान कर देते हैं।


भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम

राधा अष्टमी के अवसर पर जगह-जगह भजन मंडलियां “राधे रानी के भजनों” का गायन करती हैं। ढोल, मंजीरे और करताल की धुन पर भक्त झूम उठते हैं। शाम को भव्य झांकी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जिनमें राधा-कृष्ण की लीलाओं का मंचन होता है। यह कार्यक्रम श्रद्धालुओं को भक्तिरस में डुबो देता है।


राधा अष्टमी का आध्यात्मिक महत्व

राधा रानी को भक्ति और प्रेम की देवी माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि कृष्ण बिना राधा अधूरे हैं। राधा का नाम कृष्ण से पहले लिया जाता है क्योंकि वह परम भक्ति और प्रेम की प्रतीक हैं। राधा अष्टमी हमें यह संदेश देती है कि ईश्वर की सच्ची आराधना केवल भक्ति और प्रेम से ही संभव है।


भक्त हुए भावविभोर

बरसाना धाम में जब मंदिर में राधा रानी की झांकी सजाई जाती है, तो भक्तों की आंखें खुशी और आस्था से छलक उठती हैं। कोई भजन गा रहा होता है, कोई नृत्य कर रहा होता है और कोई ध्यान में लीन हो जाता है। हर भक्त अपने तरीके से राधा रानी के चरणों में समर्पित होकर भावविभोर हो जाता है।


निष्कर्ष

राधा अष्टमी का पर्व बरसाना में केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि आस्था, भक्ति और प्रेम का अद्भुत संगम है। इस दिन बरसाना की धरती पर आने वाला हर व्यक्ति एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटता है। वास्तव में यह उत्सव हमें याद दिलाता है कि जब जीवन में प्रेम, श्रद्धा और भक्ति होती है, तभी जीवन पूर्णता प्राप्त करता है।


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